रात को plane अपना अपना रास्ता कैसे बदलता है ?

क्या आप सबको पता है? कि रात को प्लेन अपना रास्ता कैसे बदलता है? हम बहुत से लोग plan में यात्रा तो करते हैं पर उनको यह पता नहीं होता कि रात को सफर करने से रिक्स होता है की नहीं ? क्या या नहीं तो आज हम इसके ऊपर डिस्कस करने वाले हैं और आप सबको इसका जवाब भी देंगे तो बने रहिए हमारे साथ और चले में आज इस टॉपिक में आप सबको विश्लेषण करके दिखाई देता हूं। और आपको बताऊंगा कि पहले लोग प्लेन को रास्ता पता करने के लिए क्या करते थे ? और कैसे पता करते थे? कि plane को वहीं पर लैंड करना है? क्योंकि पहले तो कोई इलेक्ट्रॉनिक चीज भी नहीं होती थी ?

रात को plane अपना अपना रास्ता कैसे बदलता है ?

Air plane रात को अपना रास्ता कैसे पता करता है। सबसे बड़ा टॉर्पिक बंद कर आसमान में प्लेन को देखकर कई लोगों के मन में एक सवाल आता है। आखिर रात में प्लेन को अपने रास्ते कैसे पता चलता है ? कुछ लोगों को यह लगता है कि प्लेन तो हवा में उड़ता है। वह कहीं भी जा सकता है पर हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं है प्लेन को भी खुद का रास्ता होता है। प्लेन अपना रास्ता छोड़कर दूसरे रास्ते में जाने का परमिशन नहीं होता है प्लेन का यह तय किया हुआ रास्ता होता है और जो रास्ते में उसे लैंड करना है। वही लैंड करता है। दूसरे जगह लैंड की अनुमति नहीं दी जाती है। वही लैंड कर सकता है क्योंकि बाकी रास्ते और PLANE के लिए होता है अगर पायलट बिना किसी अनुमति के LAND कर देता है तो वह प्लेन एक्सीडेंट भी हो सकता है और प्लेन का जो पायलट होगा उसका लाइसेंस कैंसिल कर दिया जाएगा।

और जेल भी हो सकता है और पायलट को आदेश देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक अवजार का यूज किया जाता है जिसका नाम रेडियो रेडर नामक लाइट का यूज किया जाता है। इसका अलावा एयर ट्रेफिक कंट्रोलर भी होता है। जो पायलट को आगमन करते रहता है कि पायलट को कितना ऊंचाई पर प्लेन को चलाना है और कितना स्पीड में चलाना है। और कहां पर लैंड करना है ?और पायलट को रास्ता दिखाने वाले एयर कंट्रोल होते हैं जो कि पायलट को रास्ता दिखाता है। पर कुछ लोग टॉनिक चीजों का यूज नहीं किया जाता था उस टाइम प्राकृतिक दिस्टि का यूज किया जाता था जैसे कि जमीन , रेलवे पटरी , पहाड़ देखकर ही लैंड किया जाता था।

उसके बाद अमेरिका में जमीन पर बहुत बड़ा बड़ा RED कॉलर का तीर बनाते थे जो कि पायलट को आसमान के ऊपर से क्लीयरली दिखाई दे सके और पायलट समझ सके कि हमें यहीं पर लैंड करना है। आप लोगों के मन में एक सवाल आता होगा कि रात को यह कि पायलट को कैसे दिखाई देगा? तो इसका भी उपाय अमेरिका ने कर रखा था रात को उसकी RED कॉलर का तीर के बीच एक रेड लाइट जलती थी जिसे पायलट को पता चल जाता था कि PLANE इस जगह लैंड करना है । उसके बाद ही रेडियो रेडर एयर ट्रैफिक को यूज करते थे।

अगर आप को ये इनफार्मेशन देने में सफल हुआ हु तो कृपया सपोर्ट करे।

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